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कंपनी का एक हिस्सा रखना
शेयर एक कंपनी का एक छोटा, बराबर का टुकड़ा है, इसलिए शेयर रखने से आप एक हिस्सेदार मालिक बन जाते हैं जिसका हिस्सा वैल्यू में बढ़ या घट सकता है।
एक लाइन में
क्या हो अगर आप अपनी पसंदीदा बिस्कुट बनाने वाली कंपनी का एक छोटा सा हिस्सा खरीद सकें?
आसान भाषा में
सोचिए एक पिज़्ज़ा को 8 बराबर टुकड़ों में काटा गया है: अगर आपके पास 2 टुकड़े हैं, तो आपके पास पिज़्ज़ा का एक चौथाई हिस्सा है। एक कंपनी को हजारों या लाखों बराबर टुकड़ों में काटा जा सकता है जिन्हें शेयर (shares) कहते हैं, और कुछ शेयर खरीदने से आप उस कंपनी के हिस्सेदार बन जाते हैं। अगर बाद में लोग उस कंपनी के शेयर ज़्यादा चाहते हैं, तो आपके टुकड़ों की कीमत बढ़ सकती है, लेकिन वे कम भी हो सकते हैं।
सबक
एक शेयर (share) कंपनी का एक बराबर टुकड़ा है, और जो शेयर रखता है उसे शेयरहोल्डर (shareholder) कहते हैं, वह कारोबार का हिस्सेदार होता है। शेयर प्राइस (share price) एक्सचेंज (exchange) पर खरीदार और बेचने वाले तय करते हैं, इसलिए आपके शेयरों की वैल्यू (value) उसके साथ ऊपर-नीचे होती है, और कुछ कंपनियाँ अपने मुनाफे का हिस्सा शेयरहोल्डर को डिविडेंड (dividend) के रूप में भी देती हैं। भारत में शेयर NSE और BSE पर ट्रेड (trade) होते हैं, अमेरिका में New York Stock Exchange और Nasdaq पर, और जापान में Tokyo Stock Exchange पर, जहाँ शेयर आमतौर पर 100 की यूनिट (units) में खरीदे जाते हैं। लोग अक्सर स्टॉक (stock) कहते हैं जिसका मतलब शेयर ही होता है, तो स्टॉक रखने का मतलब है शेयर रखना।
एक उदाहरण
उदाहरण: पिज़्ज़ा के 8 टुकड़ों में से 2 रखना मतलब 25% रखना है (2 को 8 से भाग दो, फिर 100 से गुणा करो)। उसी तरह, अगर एक बिस्कुट कंपनी 1,000 बराबर शेयरों में बँटी है और आपके पास 10 हैं, तो आपके पास कंपनी का 1% है (10 को 1,000 से भाग दो, फिर 100 से गुणा करो)। 100 रुपये के शेयर प्राइस (share price) पर, आपके 10 शेयर 1,000 रुपये के हैं (10 गुणा 100)। अगर प्राइस 120 तक बढ़ता है तो वे 1,200 रुपये के हैं (10 गुणा 120), और अगर 80 तक गिरता है तो वे 800 रुपये के हैं (10 गुणा 80)।
एक ही बात, चार लेवल पर
- एक शेयर (share) कंपनी का एक छोटा, बराबर टुकड़ा है।
- शेयर रखने से आप शेयरहोल्डर (shareholder) बनते हैं, कंपनी के हिस्सेदार।
- आपके शेयरों की कीमत है आपके पास जितने शेयर हैं गुणा शेयर प्राइस (share price), जो हर ट्रेडिंग (trading) दिन बदलता है।
- कुछ कंपनियाँ अपने मुनाफे का हिस्सा शेयरहोल्डर को डिविडेंड (dividend) के रूप में देती हैं, लेकिन यह ज़रूरी नहीं है।
- एक शेयर प्राइस (share price) दिखाता है कि खरीदार और बेचने वाले कंपनी के भविष्य के बारे में क्या उम्मीद करते हैं, इसलिए यह गिर सकता है भले ही कंपनी आज अच्छा कर रही हो।
ये गलतियाँ मत कीजिए
- यह सोचना कि किसी मशहूर कंपनी का शेयर प्राइस सिर्फ बढ़ सकता है।
- यह सोचना कि एक शेयर से आप कंपनी चला सकते हैं, जबकि यह कई में से एक छोटा सा टुकड़ा है।
- यह भूल जाना कि आपके शेयरों की कीमत निकालते समय शेयरों की संख्या से गुणा करना है।
खुद को जाँचिए
शेयर (share) क्या है?
कंपनी का एक छोटा, बराबर टुकड़ा. हर शेयर कंपनी का एक बराबर हिस्सा है।
जो शेयर रखता है उसे क्या कहते हैं?
शेयरहोल्डर (shareholder). शेयरहोल्डर (shareholder) कंपनी का हिस्सेदार होता है।
एक पिज़्ज़ा के 8 बराबर टुकड़े हैं और आपके पास 2 हैं। आपका हिस्सा कितना है?
चौथाई. 8 में से 2 मतलब चौथाई, या 25%।
बड़ी कंपनियों के शेयर आमतौर पर कहाँ ट्रेड (trade) होते हैं?
स्टॉक एक्सचेंज (stock exchange) पर. स्टॉक एक्सचेंज (stock exchanges) शेयरों के लिए मार्केट (markets) हैं।
एक कंपनी के 1,000 शेयर हैं और आपके पास 10 हैं। आपके पास कितना प्रतिशत है?
1%. 10 को 1,000 से भाग दो, फिर 100 से गुणा करो, तो 1% होता है।